सिरका। अरगड्डा बिमला मंदिर के प्रांगण में शुक्रवार को चैती दुर्गा पूजा विजयादशमी पर इस बार बिना सिंदूर खेला के ही संपन्न हो गया। लोगों ने बताया कि लगभग 34 वर्षों के अंतराल में पहली बार मां चैती दुर्गा की पूजा बिना सिंदूर खेला खेले पूरी हुई है। ज्ञात हो कि कोरोना महामारी को लेकर पूजा समिति के लोगों ने चैती दुर्गा पूजा सामान्य रूप से मनाई। इस दौरान पूजा स्थल के समीप भक्तों ने कोई भी भीड़-भाड़ जैसा माहौल नहीं बनाया।
इसी को ध्यान में रखते हुए विजयादशमी पर भी महिला भक्तों ने अपने अतुल्य कोरोना से लड़ने की लड़ाई को भक्ति से दूर होकर अपने अपने घरों पर रहकर दिया। पूजा समिति ने बताया कि माता के पूजन अनुष्ठान में ब्राह्मण और पूजारी दूर- दूर बैठकर ही बिमला मंदिर प्रांगण में स्थापित मां के कलश को रखकर पूजा- अर्चना की। शुक्रवार संध्या को मां का कलश विसर्जन अरगड्डा के दामोदर नदी पर किया गया। इससे पूर्व भक्तों ने मां जगत जननी दुर्गा से कोरोना जैसे महामारी से अपने क्षेत्र अरगडा सहित पूरे विश्व की रक्षा करने का आशीष मांगा। सभी ने संकल्प लिया कि घरों में रहकर कोरोना को हम सभी मिलकर जरूर पराजित कर पाएंगे।
इसी को ध्यान में रखते हुए विजयादशमी पर भी महिला भक्तों ने अपने अतुल्य कोरोना से लड़ने की लड़ाई को भक्ति से दूर होकर अपने अपने घरों पर रहकर दिया। पूजा समिति ने बताया कि माता के पूजन अनुष्ठान में ब्राह्मण और पूजारी दूर- दूर बैठकर ही बिमला मंदिर प्रांगण में स्थापित मां के कलश को रखकर पूजा- अर्चना की। शुक्रवार संध्या को मां का कलश विसर्जन अरगड्डा के दामोदर नदी पर किया गया। इससे पूर्व भक्तों ने मां जगत जननी दुर्गा से कोरोना जैसे महामारी से अपने क्षेत्र अरगडा सहित पूरे विश्व की रक्षा करने का आशीष मांगा। सभी ने संकल्प लिया कि घरों में रहकर कोरोना को हम सभी मिलकर जरूर पराजित कर पाएंगे।


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