जिला रामगढ़ रिपोर्ट आरकांत/तपन
अरगड्डा पानी टंकी के समीप सड़क किनारे खाना बनाते रामा डोम व उनकी पत्नी मनिका देवी
मुर्गी के चमड़ो को छुड़ाती महिला
- दुर्गा मंडप में रहकर इधर उधर से फेंके हुए मुर्गी के चमड़ो और अनाज से कर रहे हैं गुजारा
लॉकडाउन के बाद से ही कोयलांचल अरगड्डा- सिरका में गरीबों के हालात में तेजी से बुरा प्रभाव पड़ने लगा है। यहां के लगभग पांच हजार से भी अधिक गरीब परिवारों के बीच दो जून की रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। गरीब परिवारों के बच्चों और महिलाएं खाने के अभाव में बिलख रहे हैं। किसी भी समाजिक संगठनों के द्वारा भोजन वितरण की सूचना पर लंबी कतारें लगा भोजन लेते नजर आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अरगड्डा क्षेत्र में बीते 20 वर्षों से प्लास्टिक, कुड़ो को चुनकर अपना गुजारा करने वाले गरीब दंपति कॉलोनियों के घरों के द्वारा फेंके जाने वाले झूठे भोजन और मुर्गियों की फेंके गए चमड़ो को खाकर किसी तरह अपनी जान बचाए हुए हैं। इन लोगों को अभी तक किसी भी तरह की सरकारी और गैर सरकारी मदद नहीं मिल पाई है। इनके पास राशन कार्ड भी नहीं है। जिसके कारण इनके हालात दिन प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं। शनिवार को अरगड्डा इंदिरा चौक के समीप मौजूद पानी टंकी के पास दोपहर में इन दंपत्ति परिवारों को खाना बनाते देखा गया। इस दौरान पूछे जाने पर रामा डोम और उनकी पत्नी मनिका देवी ने बताया कि हम लोग सियाल पोड़ागेट के रहने वाले हैं और प्रतिदिन अरगड्डा सिरका के कांंलोनियों के आस-पास घूम घूम कर प्लास्टिक कुड़ो को चुनकर रामगढ़ ले जाकर कबाड़ी को देते हैं। जिसके बाद यहां से हमें 200 से 400 रुपए मिल जाया करते हैं। इससे हम दोनों का गुजारा चल जाता था। लेकिन 22 मार्च को कूड़ा चुनने पहुंचने के बाद अरगड्डा में ही रात में ठहर गए लॉकडाउन दूसरे दिन लग जाने से हम दोनों दंपत्ति यही रह गए। मेरे परिवार में एक लड़का राजू जो रांची में रहता है। लड़की मीना का विवाह धनबाद में हो गया है। अभी तक हम लोगों को किसी भी लोगों के द्वारा मदद नहीं मिली है। जो भी पैसे बचे थे वह भी खत्म हो गए हैं। अब इधर उधर कॉलोनियों में घूम कर यहां फेंके जाने वाले खाना और मुर्गों के चरणों को चुनकर बनाकर किसी तरह खा रहे हैं। इधर इनकी समस्या गंभीर होती जा रही है। इसे लेकर सरकार को और स्थानीय प्रतिनिधियों को गंभीर मंथन करने की आवश्यकता है। जरूरतमंद लोगों पर ध्यान देने की जरूरत है। इधर इस संबंध में अखिल भारतीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समन्वय समिति के जिलाध्यक्ष गंगा बेदिया ने सरकार से मांग की है कि क्षेत्र के ऐसे लोगों को त्वरित मदद और सहारा दिया जाए। जिससे मानवता बरकरार रहे।


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