Saturday, 9 May 2020

ग्रामीणों की आवाज बनकर कर समस्याओं को सरकार से रूबरू कराने वाले पत्रकार को बदनाम करने वालों पर हो कारवाई- करण

                         रिपोर्ट तपन झारखंड
                  बुमरी के समाजसेवी करण बेदिया 

अरगड्डा के असामाजिक तत्वों के द्वारा गरीबों की आवाज दबाने और पत्रकार को बदनाम करने का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब देखने को मिल रहा है। यहां के बुमरी समाजसेवी करण बेदिया ने शनिवार को इस मसले को लेकर अपना पक्ष प्रेस बयान देकर रखा है। उन्होंने कहा है कि स्वच्छ एवं साफ- सुथरे पत्रकार रविकांत जी अपनी पत्रकारिता से ग्रामीण इलाकों की समस्याओं से लगातार सरकार और जनप्रतिनिधियों को रूबरू करवा रहे हैं। इनके शब्दों के चोट से समाज के विपरीत कार्य करने वाले असामाजिक तत्वों को भी काफी परेशानी होने लगी है। ऐसे लोगों की हम सभी ग्रामीण अपनी ओर से निंदा और विरोध करते हैं। एक पत्रकार देश और समाज का वह आइना है। जिससे समाज में हो रहे गतिविधियों की जानकारी शहर से लेकर गांव के छोटे कस्बों को उनके  समाचार पत्र, वीडियो मीडिया के माध्यम से मिल पाती है। समाज में उनके गतिविधियों से हम लोगों को सभी तरह की जानकारी मिल जाती है। देश में मीडिया संसार का एक बहुत बड़ा माध्यम है। मीडिया कर्मी पर चोट करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर चोट करने के समान है। इसी तरह की चोट असमाजिक तत्वों के द्वारा सिरका-अरगड्डा के युवा पत्रकार रविकांत जी के साथ किया गया। इन्हें असामाजिक तत्वों के द्वारा फेसबुक और व्हाट्सएप पर बदनाम करने के लिए मीडिया की रिपोर्ट की खिल्ली उड़ाने के लिए गरीब महिला से जबरन बयान दिलवाकर बदनाम करने का काला कारनामा किया गया। जो काफी निंदनीय है। जिसकी हम सभी ग्रामीण जनता कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। पत्रकार को गरीबों की खबर नहीं छापने के लिए असामाजिक तत्व धमकी देकर कलम रोकने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसी ताकतों को जनता को सब मिलकर रोकने की जरूरत है। इन सभी गलत लोगों के कारण क्षेत्र का नाम बदनाम और माहौल खराब हो रहा है। इनके गलत कारनामों के चलते क्षेत्र के लोगों में लगातार भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। जिसे रोकने के लिए गोलबंद होकर आंदोलन करने की भी जरूरत है। क्षेत्र के ग्रामीण युवा पत्रकार के सकारात्मक सहयोग से गांव विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। जो आने वाले दिनों में ग्रामीणवासियों के लिए अच्छा संकेत देने वाला होगा। जबकि दूसरी ओर कुछ लोग अपना तबला बजाकर लोगों को खुद अपना धुन सुनना चाहते हैं। जिनके सुर खुद खराब हैं। वह दूसरों को सुरीला बनाने में लगे हुए हैं। ऐसे लोगों के ऊपर सरकार को कार्रवाई कर इनके द्वारा वर्तमान और भविष्य में किए गए, गलत, गैर कानूनी कार्यो की जांच कर इन पर कारवाई की जरूरत है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के लोग एकजुट होकर असमाजिक तपको को सबक सिखाने का काम करेगी। साथ ही ऐसे ढोंगी लोगों को चिन्हित कर बहिष्कार करने का भी काम करेगी। जिसके लिए आपसी बैठक कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। हम सभी युवा अपने क्षेत्र के युवा पत्रकार के साथ हर स्थिति में खड़े हैं।

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