Wednesday, 20 May 2020

कोयला मजदूरों को कमर्शियल माइनिंग से होगा नुकसान- सीसीएल सीकेएस

                   रिपोर्ट आरकांत/तपन झारखंड
सीसीएल सीकेएस सदस्य प्रदर्शन के दौरान प्रबंधन को मांग पत्र देते हुए।

अरगडा जीएम ऑफिस गेट के समक्ष बुधवार को सीसीएल सीकेएस (बीएमएस) के सदस्यों ने 7 सूत्री मांगों को लेकर प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इसकी अगुवाई प्रतिनिधि दीपू अखौरी ने की। अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सरकार कोयला जगत में कमर्शियल माइनिंग लागू कर मजदूरों का शोषण करने पर तुली है। जिससे मजदूरों को काफी नुकसान होगा। इससे मजदूरों के अधिकार और कार्य पर भी असर पड़ेगा। उन्हें आर्थिक क्षति का भी सामना उठाना पड़ेगा। प्रदर्शन के दौरान प्रबंधन के अरगडा क्षेत्र एसओपी गिरीश चंद्र, सुरक्षा अधिकारी एसके तिवारी को सीसीएल सीकेएस प्रतिनिधियों ने 7 सूत्री मांग पत्र सौंपा। इसमें कोयला सेक्टर को कमर्शियल माइनिंग एवं निजीकरण के निर्णय को अविलंब वापस लेने, सीएमपीडीआई को कोल इंडिया से अलग करने की साजिश रोकने, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं गुजरात प्रदेश के सरकारों द्वारा श्रम कानून रद्द करने के लिए पारित आदेश को वापस लेने। महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान, उड़ीसा, बिहार समेत अन्य राज्य सरकार द्वारा बढ़ाए गए काम के घंटे के निर्णय की वापसी लेने। सभी श्रमिकों को मार्च और अप्रैल 2020 की मजदूरी पूरी रकम का भुगतान सुनिश्चित करने। प्रवासी मजदूरों के लिए दोनों तरफ के भोजन, आश्रय, स्वास्थ, परिवहन रोजगार देने। प्रवासी मजदूरों का राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्टर तैयार करने आदि मांगे की है। मौके पर दीपू अखौरी, सुधीर मिश्रा, अखिलेश सिंह,  मदन कुमार, दीपक कुमार, रामसेवक सिंह, हरबंस सिंह, सोहेल खान आदि सदस्य उपस्थित थे।

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